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20 साल पुराने चर्चित पवन राजे हत्याकांड में बड़ा फैसला: अंबेडकरनगर के कैलाश यादव समेत सभी आरोपी बाइज्जत बरी, समर्थकों में खुशी की लहर

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अम्बेडकरनगर। महाराष्ट्र की राजनीति और अपराध जगत में वर्ष 2006 में सुर्खियों में रहे पवन राजे निंबालकर हत्याकांड में आखिरकार दो दशक बाद अदालत का बड़ा फैसला आ गया। बहुचर्चित इस मामले में अंबेडकरनगर निवासी कैलाश यादव समेत सभी आरोपियों को अदालत ने बाइज्जत बरी कर दिया। फैसले के बाद उनके पैतृक जनपद अंबेडकरनगर में खुशी का माहौल है। समर्थक और शुभचिंतक इसे न्याय की जीत बताते हुए जश्न मना रहे हैं।

कैलाश यादव, जिले के जाने-माने समाजसेवी शरद यादव के पिता हैं, जो प्रभावती कैलाश चैरिटेबल ट्रस्ट (पीके चैरिटेबल ट्रस्ट) के संस्थापक एवं अध्यक्ष के रूप में लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़े हैं। पीके चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा प्रतिवर्ष राजशाही अंदाज में जरूरतमंद बेटियों का सामूहिक विवाह कराया जाता है, जिसमें सांसद, विधायक, एमएलसी सहित हजारों की संख्या में गणमान्य लोग पहुंचकर नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हैं। ट्रस्ट द्वारा प्रतिवर्ष 51 जरूरतमंद महिलाओं को निःशुल्क सिलाई मशीन वितरित कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य भी किया जाता है। अदालत के फैसले की खबर मिलते ही ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों ने खुशी व्यक्त करते हुए इसे “सत्य की जीत” करार दिया।

बताया जाता है कि वर्ष 2006 में महाराष्ट्र के ठाणे जिले में हुए चर्चित पवन राजे निंबालकर हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। अदालत द्वारा बरी किए गए आरोपियों में प्रशांत उर्फ प्रदीप पटेल, सतीश मांडरे, मोहन शुक्ल, शशिकांत कुलकर्णी, कैलाश यादव, दिनेश तिवारी, पिंटू सिंह और छोटे पांडे शामिल हैं।

पिछले करीब 20 वर्षों से यह मामला अदालत में विचाराधीन था। लंबी कानूनी प्रक्रिया, गवाहों की सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने आरोप सिद्ध न होने पर सभी आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया।

फैसले के बाद ट्रस्ट के सदस्यों ने कहा कि वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार सच सामने आ गया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ने तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देकर यह साबित कर दिया कि न्याय में भले देर हो, लेकिन अंधेर नहीं होता।

समर्थकों का कहना है कि कैलाश यादव और उनका परिवार वर्षों से इस मुकदमे की पीड़ा झेल रहा था। अब अदालत के फैसले से परिवार को बड़ी राहत मिली है। जिले में उनके शुभचिंतकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया और इसे सत्य एवं न्याय की विजय बताया।

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