WhatsApp Icon

कुवैत में फंसे युवक ने बजरंगी भाई जान को किया सिर्फ एक मैसेज और–

Sharing Is Caring:

भोपाल/अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान – एडिटर इन चीफ) विदेश भेजने के नाम पर फ़र्ज़ी एजेंट का भोले भाले को लगातार शिकार बन रहे हैं। सोशल मीडिया के दौर में पीड़ितों को थोड़ी राहत अवश्य मिल जा रही है लेकिन वो ठगी का शिकार होने से नहीं बच पाया रहे हैं।
विदेश में फंसे भारतीय की मदद का बीड़ा उठाने वाले सैय्यद आबिद हुसैन उर्फ बजरंग भाई जान की मुहिम दिन प्रति दिन सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित कर रही है लेकिन इस के बावजूद कबूतरबाज (फ़र्ज़ी एजेंट) अपने जाल में शिकार (भोले भाले युवकों) को फंसाने में सफल हो जा रहे हैं।
अगस्त माह में बजरंग भाई जान के मोबाइल पर कुवैत में फंसे फतेहपुर के नज़र मोहम्मद ने सिराफ़ एक व्हाट्सअप मैसेज भेज कर मदद की गोहार लगाई। कुवैत में फंसे नज़र मोहम्मद ने बताया था कि वो अपने एक पहचान वाले के माध्यम से फरवरी 2022 में कुवैत आया था लेकिन उसे दूसरा काम दिया गया और टार्चर करने के साथ सैलरी भी रोक दिया। श्री नज़र ने अपनी जान का खतरा बताते हुए लिखा था कि उसे किसी फ़र्ज़ी केस में फंसने के षड्यंत रचा जा रहा है।
श्री आबिद ने उक्त मैसेज को गंभीरतापूर्वक लेते हुए तत्काल कुवैत एम्बेसी से संपर्क किया जिसके बाद श्री नज़र को शेल्टर हाउस भेज कर रहने खाने की व्यवस्था की गई। कागज़ी खानापूर्ति के उपरांत गत 28 अगस्त को नज़र मोहम्मद अपने वतन भारत लौटा और उसने आबिद हुसैन का धन्यवाद ज्ञापित किया। श्री आबिद ने भारत सरकार व एम्बेसी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए धन कमाने की लालच में विदेश जाने वालों से अपील किया कि फ़र्ज़ी एजेंटों से सावधान रहें और एग्रीमेंट को किसी जानकार से चेक करा लिया करें अन्यथा आप मुश्किल में फंस सकते हैं। ज्ञात रहे सैय्यद आबिद हुसैन अम्बेडकर नगर जनपद के निवासी हैं एवं मध्यप्रदेश के भोपाल में रहकर अपना जीवन यापन करते हैं।

बहरहाल कुवैत में फंसे नज़र मोहम्मद ने बजरंगी भाई जान को किया सिर्फ एक मैसेज और उनके प्रयास से वो सकुशल अपने वतन लौट आया।

अन्य खबर

श्रवण क्षेत्र धाम पर चार दिवसीय महोत्सव की तैयारी, किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

लापता हुई मानसिक विक्षिप्त युवती की तलाश जारी, मदद की गोहार

बसखारी में ऑल इंडिया मुशायरा आज, सितारों का होगा जमावड़ा, विभूतियों को मिलेगा सम्मान

error: Content is protected !!

We use cookies for analytics and advertising. By continuing to use this site, you consent to our use of cookies.