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ई-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था के विरोध में दस्तावेज लेखकों की हुंकार, सांकेतिक हड़ताल कर सौंपा ज्ञापन

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ई-रजिस्ट्रेशन से दस्तावेज लेखकों व उनसे जुड़े लोगों के समक्ष रोजी-रोटी का बड़ा संकट!

अम्बेडकरनगर: उत्तर प्रदेश में लागू की जा रही नई ई-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था के विरोध में दस्तावेज लेखकों ने जनपद की पांचों रजिस्ट्रार कार्यालय पर आक्रोश प्रकट किया। दस्तावेज़ लेखक संघ टाण्डा ने भी मंगलवार को सांकेतिक हड़ताल कर अपनी नाराजगी जाहिर की। संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सब-रजिस्ट्रार सत्येंद्र कुमार यादव को सौंपते हुए नई व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की।

दस्तावेज लेखकों का कहना है कि ऑनलाइन ई-पंजीकरण प्रणाली लागू होने के बाद दस्तावेज लेखकों को प्रक्रिया से लगभग बाहर कर दिया गया है, जिससे वर्षों से इस पेशे से जुड़े हजारों परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। ज्ञापन में कहा गया कि उत्तर प्रदेश दस्तावेज लेखक नियमावली-1977 के तहत दस्तावेज लेखक पंजीकरण व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा रहे हैं और आम जनता को सुलभ, किफायती एवं वैधानिक सेवाएं उपलब्ध कराते आए हैं।


संघ ने मांग की कि दस्तावेज लेखकों को भी ई-पंजीकरण प्रक्रिया में अधिकृत एजेंट/यूजर के रूप में शामिल किया जाए तथा उन्हें पोर्टल पर लॉग-इन की सुविधा प्रदान की जाए। साथ ही निःशुल्क प्रशिक्षण, बायोमेट्रिक उपकरणों के लिए आर्थिक सहायता और फ्रंट ऑफिस योजना से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने की भी मांग उठाई गई।
दस्तावेज लेखकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
सांकेतिक हड़ताल एवं ज्ञापन कार्यक्रम में जुनैद अर्शी खान, मनोज कुमार वर्मा, राजेश कुमार यादव, महेश कुमार वर्मा, रमेश यादव, पंकज त्रिपाठी, मोहम्मद कौसर, शराफत हुसैन, आत्माराम सहित अनेक दस्तावेज लेखक मौजूद रहे।

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