अम्बेडकरनगर जनपद में प्रभारी मंत्री ओमप्रकाश राजभर सहित कई मंत्री और जनप्रतिनिधियों का लगातार आगमन होता है। सरकारी योजनाओं और विकास के दावे भी खूब किए जाते हैं, लेकिन जैतपुर थाना क्षेत्र के लखमीपुर पुरवा कर्मुल्लाहपुर गांव की तस्वीर हर बरसात में वही पुराना सवाल खड़ा कर देती है—जब समस्या हर साल सामने आती है तो स्थायी समाधान आखिर कब होगा।
लगातार हो रही बारिश से टौंस नदी का जलस्तर बढ़ा तो गांव को जोड़ने वाला लकड़ी का ‘चेहली’ पुल एक बार फिर तेज बहाव में डूब गया। पुल के जलमग्न होते ही गांव का संपर्क प्रभावित हो गया। स्कूली बच्चों की पढ़ाई, किसानों का खेत तक पहुंचना, मरीजों का अस्पताल जाना और महिलाओं का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। ग्रामीणों को मजबूरन 5 से 6 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर दूसरे रास्ते का सहारा लेना पड़ा।
ग्रामीण कमलेश कुमार, आसाराम, जयराम चौहान समेत अन्य लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। हर वर्ष बरसात आते ही यही पुल बह जाता है या डूब जाता है और गांव कई दिनों तक परेशानी झेलता है। इसके बावजूद आज तक पक्के पुल के निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
हालात बिगड़ने पर ग्रामीणों ने प्रशासन से नाव उपलब्ध कराने की मांग की। जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रशासन हरकत में आया और तहसील टांडा से नाव मंगाकर गुरुवार को गांव में उपलब्ध करा दी गई। नाव शुरू होने के बाद लोगों को नदी पार करने में राहत मिली और आवागमन फिर से शुरू हो गया।
अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) रंजीत सिंह ने बताया कि नाव की व्यवस्था से फिलहाल आवागमन सामान्य हो गया है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को टौंस नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने और जरूरत के अनुसार सभी आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।
हालांकि ग्रामीण साफ कहते हैं कि नाव राहत जरूर है, लेकिन समाधान नहीं। उनका कहना है कि जब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को यह पता है कि हर मानसून में यही संकट खड़ा होता है, तो आखिर स्थायी पक्का पुल बनाने का निर्णय अब तक क्यों नहीं लिया गया।
ग्रामीणों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि टौंस नदी पर जल्द से जल्द पक्का पुल बनाया जाए, ताकि हर वर्ष बरसात में गांव का संपर्क न टूटे और बच्चों, किसानों, मरीजों तथा महिलाओं को बार-बार इस परेशानी का सामना न करना पड़े।
सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर किसका इंतज़ार है?
क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही फाइलें खुलेंगी, या फिर हर साल पुल डूबेगा, नाव चलेगी और वादे भी टौंस की लहरों में बहते रहेंगे?




