लापरवाह डॉक्टरों ने चूहा के काटने की बात कहकर टाल दिया… और 06 साल की मासूम अंशिका की चली गई जान!
अम्बेडकरनगर: ये सिर्फ एक मौत नहीं, सिस्टम की निर्मम नाकामी है। अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के खपुरा डढ़वा गांव की 6 वर्षीय अंशिका गुरुवार शाम खेल रही थी, तभी किसी जहरीले जंतु ने उसे काट लिया। परिजन उम्मीद लेकर जिला अस्पताल पहुंचे—लेकिन आरोप है कि वहां संवेदनहीनता और लापरवाही का इलाज मिला, इलाज नहीं।
परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने मामले को गंभीर मानने के बजाय “चूहा काट गया होगा” कहकर टाल दिया। सही समय पर सही उपचार नहीं मिला और मासूम ने दम तोड़ दिया। एक बच्ची की सांसें थम गईं, और अस्पताल की दीवारें खामोश रहीं।मौत की खबर मिलते ही गुस्सा फट पड़ा। परिजनों ने बच्ची का शव जिला अस्पताल के गेट पर रख दिया और हंगामा नहीं, इंसाफ की चीख शुरू हो गई। “लापरवाह डॉक्टरों पर कार्रवाई करो” के नारे गूंजने लगे। देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीण जुट गए और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
स्थानीय लोगों में चर्चा है कि रात के समय जिला अस्पताल “संविदा डॉक्टरों के भरोसे” चलता है, जहां न जिम्मेदारी तय है, न जवाबदेही। सवाल उठ रहा है—क्या सरकारी अस्पताल अब ट्रायल रूम बन चुके हैं, जहां मरीजों की जिंदगी प्रयोग बनकर रह गई है।
हालात बेकाबू होते देख एसडीएम सदर प्रतीक्षा सिंह और सीओ सिटी नीतीश कुमार मौके पर पहुंचे। समझाने की कोशिश हुई, लेकिन गुस्से में उबल रहे परिजन साफ कह रहे हैं—“अब सिर्फ आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए।” मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है।
सबसे बड़ा सवाल है कि क्या एक मासूम की जान की कीमत सिर्फ “जांच के आदेश” है, क्या जिला अस्पतालों में इलाज अब लापरवाही की लॉटरी बन चुका है।
अंशिका चली गई… लेकिन पीछे छोड़ गई एक कड़वा सच— इस सिस्टम में गरीब की जान सबसे सस्ती है।




