अम्बेडकरनगर: जैतपुर थाना क्षेत्र के आशापार गांव में अधेड़ संतोष तिवारी की बेरहमी से हुई हत्या ने सोमवार को प्रशासन की सांसें अटका दीं। पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचते ही परिजन फट पड़े और साफ ऐलान कर दिया — “मुआवजा नहीं तो दाह संस्कार नहीं।” इसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
घर के बाहर मातम कम और आक्रोश ज्यादा दिखा। परिजनों ने शव को रखकर हंगामा शुरू कर दिया और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप जड़ दिया। सवर्ण ब्राह्मण सभा के पदाधिकारी भी मौके पर डट गए, जिससे माहौल पूरी तरह उग्र हो गया। हालात बिगड़ते देख क्षेत्राधिकारी अनूप कुमार सिंह और तहसीलदार निखिलेश वर्मा फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन परिजन टस से मस नहीं हुए। गुस्साए परिवार ने दो टूक कहा — “सिर्फ दिलासा नहीं, लिखित भरोसा चाहिए।”
घंटों चली मान-मनौव्वल और दबाव के बीच आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। उच्चाधिकारियों तक बात पहुंचाने और हरसंभव मदद का भरोसा मिलने के बाद ही परिजन माने। मृतक की पत्नी कमला देवी ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपा, तब जाकर मामला शांत हुआ। इसके बाद भारी पुलिस पहरे में चहोड़ा घाट पर अंतिम संस्कार कराया गया, लेकिन गांव में अब भी गुस्सा सुलग रहा है।
बताया जा रहा है कि शनिवार रात संतोष तिवारी की गला काटकर उस समय हत्या कर दी गई थी, जब वह बारात से लौटकर पशुशाला के पास सो रहे थे। इस खौफनाक वारदात ने इलाके में सनसनी फैला दी है। क्षेत्राधिकारी अनूप कुमार सिंह का दावा है कि पुलिस टीमें लगी हैं और जल्द ही आरोपी सलाखों के पीछे होंगे। लेकिन सवाल वही— क्या यह आश्वासन भी बाकी मामलों की तरह ठंडा पड़ जाएगा, या इस बार सच में न्याय होगा।




