WhatsApp Icon

✍️ संपादकीय | अम्बेडकरनगर की सियासत: मुस्लिम प्रतिनिधित्व, भरोसा व आगामी चुनाव में सपा की अग्निपरीक्षा

Sharing Is Caring:

✍️ संपादकीय

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अम्बेडकरनगर की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ सिर्फ समीकरण नहीं, बल्कि भरोसे की राजनीति दांव पर है। समाजवादी पार्टी, जो कभी इस जनपद में सामाजिक संतुलन और मुस्लिम प्रतिनिधित्व की मिसाल मानी जाती थी, आज उसी सवाल से जूझती नज़र आ रही है—क्या वह अपने पुराने राजनीतिक उसूलों पर लौटेगी या हालात को समय के भरोसे छोड़ देगी?
अम्बेडकरनगर की पांचों विधानसभा सीटों का राजनीतिक इतिहास बताता है कि समाजवादी पार्टी शुरू से ही कम से कम एक सीट पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारती रही है। यह कोई संयोग नहीं था, बल्कि सोची-समझी रणनीति थी, जिसके पीछे पार्टी के कद्दावर नेता स्वर्गीय अहमद हसन की भूमिका को हमेशा अहम माना गया। उन्होंने न सिर्फ मुस्लिम समाज को राजनीतिक मंच दिया, बल्कि दलित-पिछड़ा-अल्पसंख्यक समीकरण को इस तरह साधा कि सपा यहां लगातार मज़बूत बनी रही।


लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में अचानक यह परंपरा टूट गई। मुस्लिम नेतृत्व को टिकट वितरण से बाहर कर दिया गया। यह फैसला केवल उम्मीदवारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर सीधे समाज के मनोविज्ञान पर पड़ा। जनपद में आक्रोश था, असंतोष था, सवाल थे—लेकिन जवाब नहीं थे। इसके बावजूद मुस्लिम समाज ने “सपा की सरकार बनने” की उम्मीद में अपने गिले-शिकवे एक तरफ रखे और पांचों विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी को जीत दिलाई। यह समर्थन राजनीतिक निष्ठा से ज़्यादा भविष्य की उम्मीद पर आधारित था।
अब वही उम्मीद सपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव आसान नहीं होंगे। बदलते सामाजिक समीकरण, स्थानीय नेतृत्व की अनदेखी और पिछले फैसलों से उपजी नाराज़गी चुनाव को सपा के लिए “टेढ़ी खीर” बना सकती है। ऐसे में पार्टी के सामने यह सवाल खड़ा है कि वह मुस्लिम समाज को क्या संदेश देना चाहती है—सिर्फ चुनावी समर्थन चाहती है या वास्तविक राजनीतिक भागीदारी भी?
इन्हीं परिस्थितियों के बीच यह चर्चा तेज़ हो गई है कि समाजवादी पार्टी किसी मुस्लिम चेहरे को एमएलसी बनाकर विधानसभा की राजनीति का रास्ता साफ कर सकती है। माना जा रहा है कि यह कदम मुस्लिम समाज में यह संकेत देने के लिए होगा कि पार्टी अब भी उनके नेतृत्व को महत्व देती है। कुछ नामों की चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में तैरने लगी हैं, जो इस बात की ओर इशारा करती हैं कि पार्टी भीतरखाने रणनीति पर काम कर रही है।
लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं होते। क्या एमएलसी बनाना उस नाराज़गी की भरपाई कर पाएगा, जो पिछले चुनाव में टिकट न मिलने से पैदा हुई थी? क्या यह फैसला मुस्लिम समाज को सम्मान का एहसास कराएगा या फिर इसे महज़ एक राजनीतिक मैनेजमेंट के तौर पर देखा जाएगा? और सबसे अहम—क्या समाजवादी पार्टी इस कदम के ज़रिए सिर्फ चुनावी गणित साधना चाहती है या फिर अम्बेडकरनगर में दोबारा उस भरोसे को ज़िंदा करना चाहती है, जो कभी उसकी सबसे बड़ी ताकत हुआ करता था?
अम्बेडकरनगर की सियासत आज सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं है, यह राजनीतिक विश्वसनीयता की परीक्षा है। यहां लिया गया हर फैसला यह तय करेगा कि समाजवादी पार्टी आने वाले समय में इस जनपद में अपनी पकड़ बनाए रखेगी या फिर उसके परंपरागत समर्थक नए विकल्पों की तलाश में निकल पड़ेंगे। अब देखना यह है कि सपा इतिहास से सबक लेती है या फिर एक बार फिर भरोसे की राजनीति को जोखिम में डाल देती है। मुस्लिम चेहरे पर एमएलसी का दांव लगा कर आगामी विधान सभा चुनाव में पताका फहराने का सपा का सपना तो पूरा हो सकता है लेकिन इससे पहले मुस्लिम चेहरों पर भी चर्चाएं होगी जिसमें मुख्य रूप से पूर्व एमएलसी अतहर खान, प्रदेशीय नेता मो.एबाद, प्रदेश महासचिव अनीसुरहमान, संस्थापक सदस्यों में शामिल नफीस भाईजान, पूर्व विधायक अजीमुलहक पहलवान के पुत्र मुसाब अजीम, जलालपुर चेयरमैन अबुल बशर अंसारी, बुनकर नेता मो.नदीम अंसारी, समाजसेवी मो.अकमल जुगनू, पूर्व टाण्डा चेयरमैन हाजी इफ्तेखार अंसारी, जिला महासचिव मुजीब अहमद सोनू, टाण्डा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष फ़िरोज़ सिद्दीकी आदि नामों को शामिल किया जा सकता है। बात मुख्तसर कहें तो पिछले चुनाव का रिजल्ट बताता है कि आगामी चुनाव में भी सपा मुस्लिम चेहरों को दरकिनार कर सकती है लेकिन इससे पूर्व एमएलसी पर मुस्लिम चेहरे को आसीन कर मुस्लिम वोट को बचाने का भी रणनीति तय हो सकती है। (संपादकीय: आलम खान एडिटर, सूचना न्यूज़ टीम -मान्यता प्राप्त पत्रकार 8090884090)

अन्य खबर

दुकान के सामने से बाइक उड़ाकर चोर फरार, 24 घंटे बाद भी नहीं मिला सुराग, पुलिस से लगाई गुहार

‘पिछड़ों की जातीय गिनती से क्यों भाग रही सरकार?’ आठवें दिन भी गरजा तहसील परिसर, आरक्षण की हिस्सेदारी पर आर-पार की हुंकार

राहुल पर FIR से भड़की कांग्रेस, अम्बेडकरनगर में सड़क पर उतरे कांग्रेसी; भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर गरजे

error: Content is protected !!