बाढ़ आई तो नाव ही सहारा, सामान्य दिनों में भी दूसरे जिले से होकर पहुंचता है गांव; डीएम ने जानी जमीनी हकीकत, पशुओं के चारे-दवाओं के इंतजाम के दिए निर्देश
अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान एडिटर-मान्यता प्राप्त पत्रकार) घाघरा नदी की कछार में बसे कई गांवों के लिए बाढ़ कोई नई आफत नहीं है, लेकिन मांझा उल्टहवा की तस्वीर बाकी गांवों से भी ज्यादा अलग और चुनौतीपूर्ण है। चारों तरफ पानी से घिरा यह गांव बाढ़ के दौरान लगभग टापू में तब्दील हो जाता है। पानी बढ़ा तो सड़क का रास्ता बंद और नाव के अलावा गांव से बाहर निकलने का कोई दूसरा सहारा नहीं। 
सिर्फ बाढ़ के दिनों में ही नहीं, सामान्य दिनों में भी मांझा उल्टहवा के ग्रामीणों को तहसील और जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए पड़ोसी जनपद बस्ती की सीमा से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए जिलाधिकारी ईशा प्रिया खुद मांझा उल्टहवा पहुंचीं।
डीएम ने गांव में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और बाढ़ के दौरान आने वाली परेशानियों की जानकारी ली। उन्होंने सरकारी विद्यालय का भी निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं को देखा।
बाढ़ बढ़ी तो सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचें ग्रामीण
जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासन की तैयारियों से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट अपील की कि यदि जलस्तर बढ़ता है और खतरा गंभीर होता है तो ग्रामीण बिना किसी जोखिम के प्रशासन द्वारा चिन्हित सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाएं। डीएम के दौरे का खास पहलू यह रहा कि उन्होंने महज कागजी तैयारियों की जानकारी लेने के बजाय गांव की जमीनी स्थिति और ग्रामीणों के दैनिक जीवन की कठिनाइयों को करीब से देखा।
इंसान ही नहीं, बेजुबानों की भी चिंता
बाढ़ की चपेट में आने वाले इस गांव में पशुधन भी ग्रामीणों की जिंदगी का अहम हिस्सा है। इसे देखते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और जरूरी दवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि बाढ़ की स्थिति में ग्रामीणों के सामने पशुओं को लेकर भी संकट खड़ा न हो। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर पूरी सतर्कता बरतने और ग्रामीणों की जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मांझा उल्टहवा में जिलाधिकारी का दौरा प्रशासन के लिए सिर्फ बाढ़ तैयारियों का निरीक्षण नहीं, बल्कि उस गांव की हकीकत को करीब से देखने का मौका भी रहा, जहां पानी बढ़ते ही जिंदगी की रफ्तार नाव के भरोसे हो जाती है। इस दौरान अपर जिलाधिकारी ज्योत्सना बंधु, टाण्डा एसडीएम डॉ. पुष्पेंद्र पटेल समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।




