अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान एडिटर – मान्यता प्राप्त) लोकतंत्र के महापर्व में अपनी भागीदारी से पूरे प्रदेश में चर्चा बटोरने वाली 118 वर्षीय बुजुर्ग महिला रामरती देवी पत्नी स्वर्गीय विश्वनाथ वर्मा को इस बार पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची से ही गायब कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में यही रामरती देवी फूलों से सजी बग्गी पर दुल्हन की तरह सजाकर मतदान केंद्र तक लाई गई थीं और उनका मतदान पूरे जिले में लोकतांत्रिक जागरूकता का प्रतीक बना था और चुनाव आयोग ने भी सराहना करते हुए सम्मानित हेतु इनका डाटा सुरक्षित किया था लेकिन अब चुनावी रिकॉर्ड में उनका नाम नदारद है।

तहसील एवं विकास खंड टाण्डा के ग्राम पंचायत पैकोलिया की निवासी रामरती देवी का नाम ग्राम प्रधान चुनाव की अंतिम प्रकाशित मतदाता सूची में नहीं मिलने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक ऐसी महिला, जिसने पिछले लोकसभा चुनाव में मतदान किया था, उसे अचानक मतदाता सूची से किस आधार पर बाहर कर दिया गया, जबकि वो स्वस्थ व सुरक्षित हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही ने एक जीवित मतदाता को कागजों में “मृत” मान लिया है। चर्चा है कि सूची तैयार करने में भारी अनियमितताएं हुई हैं और बिना पर्याप्त सत्यापन के नाम काटे गए हैं। यदि 118 वर्ष की वरिष्ठ मतदाता का नाम ही सुरक्षित नहीं रह सका तो आम मतदाताओं के अधिकार कितने सुरक्षित हैं, यह बड़ा सवाल बन गया है।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में रामरती देवी को विशेष सम्मान के साथ फूलों से सजी बग्गी पर बैठाकर मतदान केंद्र ले जाया गया था। उस समय प्रशासन और चुनाव विभाग ने उन्हें लोकतंत्र की मिसाल बताते हुए प्रचारित किया था। अब वही विभाग उनकी मौजूदगी को मतदाता सूची में दर्ज रखने में विफल दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि रामरती देवी पूरी तरह जीवित हैं, गांव में निवास कर रही हैं और आज भी लोगों के बीच मौजूद हैं। इसके बावजूद उनका नाम अंतिम मतदाता सूची से हट जाना गंभीर प्रशासनिक चूक है। लोगों ने मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर दोषी कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए तथा रामरती देवी का नाम पुनः सूची में शामिल किया जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 118 वर्षीय रामरति देवी को चुनावी तंत्र ने जिंदा रहते हुए ही कागजों में दफन कर दिया है? यदि हां, तो यह केवल एक मतदाता का नाम कटने का मामला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है। पंचायत चुनाव की अंतिम प्रकाशित सूची पर उठे ये सवाल चुनावी व्यवस्थाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर चोट कर रहे हैं, जो चर्चा का भी व8शाय बना हुआ है।




