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अम्बेडकरनगर: दारुल उलूम मदरसा मंज़रे हक के सभागार में आधा दर्जन से अधिक मदरसा प्रबन्धकों की विशेष बैठक हुई जिसमें पवित्र माह रमज़ान व आगामी पर्व ईद के लिए कई दिशा निर्देश व अपील जारी किया है।
दारुल उलूम मदरसा मंज़रे हज के सभागार में हुई बैठक में बताया गया कि पवित्र माह रमज़ान उपासना, त्याग व लोगों की मदद करने का महीना है तथा ईद का नाम आते ही प्रत्येक मुसलमान के मन मे जोश भर जाता है और अपनी हैसियत के अनुसार तैयारियां करता है लेकिन कोरोना वायरस की महामारी के दौरान जारी लॉक डाउन के कारण ईद की खुशियां काफूर हो गई हैं। मदरसा मंज़रे हक, मदरसा कंजुल उलूम, मदरसा ऐनुल उलूम, अदारे शरैय्या, मदरसा नूरे हक, मदरसा अरबिया नुरुल उलूम आदि के प्रबंधकों ने बैठक कर कहा कि ईद के अवसर पर नया कपड़ा आदि इसलामिक शरह: से जरूरी नहीं है इसलिए मुस्लिम समुदाय से विशेष अपील किया कि गरीब, मुहताज, जरूरतमंदों, यतीम, बेवा आदि लोगों का ख्याल रखते हुए इस बार पुराने कपड़ों में ही ईद मनाएं। बैठक के उपरांत जारी अपील में कहा गया कि मुस्लिम महिलाओं का कपड़ों आदि की खरीदारी के लिए बाज़ारों में जाना आम हालत में भी नाजायज़, हराम व गुनाह है तथा कोरोना वायरस की महामारी के दौरान जारी लॉक डाउन में बाज़ारों में भीड़ लगा कर खरीदारी करना अपनी जान को मुसीबत में डालने के बराबर है क्योंकि खरीदारी के समय भीड़भाड़ में कौन कोरोना से संक्रमित है किसी को पता नहीं चलेगा। आधा दर्जन से अधिक मदरसा प्रबन्धकों ने मुस्लिम समुदाय को चेतावनी भी दिया कि ईद की खरीदारी के चक्कर मे कोई कोरोना संक्रमित मरीज मिल गया तो पूरी उम्मत मुसलमा बदनाम होगी इसलिए महिलाओं को बाज़ारों में कदापि ना जाने दें जिससे बड़े गुनाह से हम सब बच सके।
बहरहाल आधा दर्जन से अधिक मदरसा प्रबन्धकों की बैठक में मुस्लिम समुदाय से अपील किया गया यह कि ईद पर्व पर नया कपड़ा अनिवार्य नहीं है और महिलाओं को बाज़ारों में जाने से रोकें जिससे कोरोना वायरस के संक्रामण का खतरा ना बढ़ने पाए और मुस्लिम समाज पुनः ना बदनामी का सबब बने।
बैठक के दौरान मुस्लिम समुदाय से ये भी अपील की गई कि कोरोना वायरस की महामारी के दौरान जारी लॉक डाउन का समय निश्चित नहीं है इसलिए बिना आवश्यक कार्य के घरों से बाहर ना निकलें जिससे लोगों को पूरी कौम को बदनाम करने का मौका ना मिले। अपील की गई कि दूरदर्शिता का परिचय देते हुए आर्थिक मज़बूती बनाएं रखें जिससे आगे चल कर किसी का मोहताज ना बनना पड़े। धनी लोगों से भी अपील की गई है कि अधिक से अधिक लोगों की मदद करें क्योंकि पवित्र माह रमज़ान में दान देने वालों का पुण्य 70 गुना अधिक बढ़ जाता है।