अम्बेडकरनगर: अकबरपुर स्थित सूफी संत हज़रत शाह हाजी ख्वाजा शम्सुद्दीन उर्फ शम्सुल औलिया रहमतुल्लाह अलैह के 53वें सालाना उर्स मुबारक का रविवार से भव्य आगाज़ हो गया। तीन दिवसीय इस धार्मिक आयोजन में प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों अकीदतमंदों के पहुंचने की उम्मीद है। दरगाह परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और जायरीनों के स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
उर्स आयोजन समिति के फासिउद्दीन ने बताया कि उर्स के संरक्षक एवं सज्जादानशीन हाजी हाफिज शाह शमसुद्दीन मियां शिरीं व हाजी शाह फैजुद्दीन मियां शीरी द्वारा मोइन ए मिल्लत मोइनुदीन मियां कादरी नक्शबंदी की सरपरस्ती में आयोजित उर्स का कार्यक्रम 7 जून से प्रारम्भ होकर 9 जून तक चलेगा। इस दौरान कुरआनख्वानी, जिक्र-ओ-अजकार, फातिहाख्वानी, तकरीरी जलसे, नातिया महफिल, मुशायरा और कुल शरीफ सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि उर्स के पहले दिन रविवार को सुबह से जायरीनों का आगमन शुरू हुआ। फज्र की नमाज के बाद जिक्र-ए-खुदावंदी तथा दरगाह शरीफ पर फातिहाख्वानी का सिलसिला चला। शाम को अकीदतमंदों ने दरगाह पर चादरपोशी कर मुल्क में अमन, खुशहाली और तरक्की की दुआ मांगी।
उर्स के दूसरे दिन 8 जून सोमवार की रात ईशा की नमाज के बाद अल्लामा मौलाना सूफी सलाहुद्दीन मियां कादरी की अध्यक्षता में एक भव्य नातिया मुशायरा आयोजित किया जाएगा। इसमें मशहूर शायर एहसान शाकिर, फरहान बरकाती, शराफत कादरी, यूसुफ आज़ाद, शौक अशरफी, एम. हसन, मौलाना किस्मतुल्लाह सिकंदरपुरी समेत कई नामचीन शायर अपने कलाम पेश करेंगे। मुशायरे की निजामत प्रसिद्ध शायर कौहर अशरफी नानपारवी करेंगे। उर्स के दौरान प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान और सूफी उलेमा तकरीरें करेंगे। विशेष रूप से मुफ्ती फ़ैज़ुल हक़ आज़मी की रूहपरवर तकरीर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगी। कार्यक्रम में इंसानियत, मोहब्बत, भाईचारे और सूफी परंपरा के संदेश को प्रमुखता से रखा जाएगा।
उर्स के अंतिम दिन 9 जून को कुरआनख्वानी, फातिहाख्वानी और कुल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी। इसके बाद विशेष दुआ के साथ तीन दिवसीय उर्स का समापन होगा। आयोजन समिति की ओर से सभी अकीदतमंदों के लिए लंगर और तबर्रुक की भी व्यवस्था की गई है। उर्स को लेकर पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल है। दरगाह शरीफ पर श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती भीड़ यह दर्शा रही है कि हज़रत शम्सुल औलिया की शिक्षाएं आज भी लोगों के दिलों में उसी तरह जीवित हैं और अमन, प्रेम तथा भाईचारे का संदेश दे रही हैं।





