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अम्बेडकरनगर: टाण्डा नगर पालिका परिषद प्रशासन द्वारा गृह कर, जल कर व लाइसेंस शुल्क की वसूली के लिए विभिन्न वार्डों में कैम्प लगाने का क्रम लगातार जारी है तथा बकाया वसूली के लिए विधिवत एलान होने से कर दाताओं में जहां हड़कम्प मच गया वहीं चेयरमैन व ईओ भी आमने सामने नज़र आने लगे हैं।
नगर पालिका परिषद टाण्डा के अधिशाषी अधिकारी मनोज कुमा सिंह के सख्त निर्देश के बाद नगर पालिका की पूरी टीम गृह कर व जलकर की वसूली में जुट गई है। गत 10 दिनों में नगर पालिका परिक्षेत्र के विभिन्न वार्डों में विधिवत वसूली कैम्प लगाकर 10 वर्षों से चला आ रहा बकाया वसूला जा रहा है। नगर पालिका प्रशासन द्वारा ध्वनि विस्तारक यंत्रों से पालिका परिक्षेत्र में एलान कराने से कर बकाये दारों में हडकम्प मच गया। गृह कर व जलकर वसूली के मामले पर नगर पालिका अध्यक्ष रेहाना अंसारी व ईओ मनोज कुमार सिंह आमने सामने खड़े नजर आने लगे। पालिका अध्यक्ष ने वसूली के सम्बंध में जहां ईओ से प्रशासनिक आदेश मांगा वहीं ईओ ने भी कर ना वसूलने के सम्बन्धित कोई आदेश मांगा।
आपको बताते चलेंकि उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर नगर पालिका परिक्षेत्र में गृह कर व जलकर विगत 10 वर्ष पूर्व बोर्ड द्वारा पास किया गया था जिसका नगर क्षेत्र में जबरदस्त विरोध हुआ था और इसी विरोध को मुद्दा बना कर अध्यक्ष पद का पिछला दो चुनाव भी लड़ा गया था। चर्चा के अनुसार पूर्व चेयरमैन हाजी इफ्तेखार अंसारी द्वारा स्थानीय लोगों को बताया गया था कि बोर्ड बैठक में कर निरस्त कर दिया गया है जिसे अब जमा नहीं करना है तथा मौजूदा चेयरमैन ने भी स्थानीय जनता से वादा किया था कि उक्त कर लागू नहीं होने दिया जाएगा और अगर शासन का अत्याधिक दबाव हुआ तो कम से कम कर लगाया जाएगा। दूसरी तरफ नगर पालिका प्रशासन का दावा है कि बोर्ड द्वारा उक्त करों को निरस्त करने का प्रस्ताव पास हुआ था जिसकी स्वीकृत के लिए फ़ाइल अयोध्या मंडल कमिश्नर को भेजी गई थी लेकिन उक्त बोर्ड कार्यवही को कमिश्नर द्वारा निरस्त कर दिया गया था इसलिए गत 10 वर्षों का बकाया आम लोगों पर है जिसकी वसूली की जा रही है।
नगर पालिका के टी.ओ उमाशंकर सरोज ने बताया कि किसी भी कर को मात्र बोर्ड बैठक में पास कर समाप्त नहीं किया अजा सकता है। उन्होंने बताया कि नगर पालिका अधिनियम 1916 के अनुसार जिस क्रम व प्रक्रिया के तहत कर लागू किया गया हो वही क्रम व प्रक्रिया के तहत कर हटाया जाता है जबकि बोर्ड द्वारा ऐसा नहीं किया गया है। टी.एस एस.के सिंह ने बताया कि नगर पालिका की दो से टीम टीम वसूली में लगी हुई है जो प्रतिदिन विभिन्न स्थानों पर शिविर लगाया कर बकाया वसूली कर रही है। नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि मात्र 10 दिनों में नगर पालिका प्रशासन ने 15 लाख रुपये से अधिक की वसूली किया है। उन्होंने कहा कि 01 अप्रैल को बकायदारों के खिलाफ डेढ़ करोड़ रुपये की आर.सी जारी करने की प्रक्रिया तेज हो चुकी है।

गृहकर,जलकर, जल मूल्य व लाइसेंस शुल्क का भ्रम

नगर पालिका परिक्षेत्र में आने वाले आवासों पर गृहकर अर्थात हाउस टैक्स लागू है। उन सभी भवन स्वामियों को हाउस टैक्स देना होगा जिनका क्षेत्रफल 150 स्क्वायर फुट से कम है। भवन के प्रत्येक तल का स्क्वायर फुट एक ही भवन में जुटेगा। गृहकर स्वतः निर्धारण प्रक्रिया लागू है अर्थात आप अपने घर मे बने कमरों की घोषणा स्वंय करे जिसके हिसाब से कर लगेगा। गृहकर की लागत का दो गुना जलकर अदा करना होता है जिसे जलकर कहते हैं। जलकर सभी को अदा करना है चाहे उसके भवन में पानी का कनेक्शन हो या आना हो। पानी का कनेक्शन होने पर जल मूल्य अदा करना होता है लेकिन जलकर व जल मूल्य में से जो अधिक होगा मात्र उसे ही जमा करना होगा। पानी का कनेक्शन होने पर जल मूल्य न्यूनतम 252 रुपये प्रति वर्ष होता है।
दुकानदारों को लाइसेंस शुल्क अदा करना होता है, लाइसेंस शुल्क को दो हिस्सों में बांटा गया है। बड़े दुकानदारों को प्रतिवर्ष 500 रुपय तथा मध्यम व छोटे दुकानदारों को प्रतिवर्ष 300 रुपय लाइसेंस शुल्क के रूप में नगर पालिका में जमा करना होता है हालांकि लाइसेंस शुल्क अधिकांश लोग जमा करते आ रहे हैं।
उदाहरण: प्रथम तल 100 स्क्वायर फुट पर बना है लेकिन भवन दो तल का है तो 200 स्क्वायर फुट पर गृह कर लगेगा। स्वतः निर्धारण पर गृहकर 100 रुपए हुआ तो जलकर 200 रुपये हुआ अर्थात आपको 300 रुपये प्रतिवर्ष अदा करना होगा लेकिन उक्त भवन में अगर पानी का कनेक्शन भी है तो जल मूल्य प्रति वर्ष 252 रुपये होगा इसलिए आपको गृह कर 100 रुपय व जलमूल्य 252 रुपया अर्थात प्रतिवर्ष 352 रुपय अदा करने होंगे। (नोट: जानकारों के अनुसार)

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