मृतक के बेटे ने चेयरमैन व जेई पर एफआईआर की मांग की, बहन संग पालिका पहुंच नाबालिग भाई ने मांगा न्याय; चेयरमैन ने आर्थिक मदद का दिया भरोसा
अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान एडिटर – मान्यता प्राप्त पत्रकार) टाण्डा बस स्टेशन के निकट नगर पालिका परिषद द्वारा लगाए गए सार्वजनिक पेयजल फ्रीजर में कथित रूप से करंट उतरने से मजदूर बेचू लाल राजभर की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। घटना के बाद एक ओर नगर पालिका परिषद ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट तलब की है, वहीं दूसरी ओर मृतक के नाबालिग पुत्र यश कुमार ने टाण्डा कोतवाली में तहरीर देकर नगर पालिका अध्यक्ष शबाना नाज़ एवं संबंधित जूनियर इंजीनियर (जेई) आशीष कुमार के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
मंगलवार को मामले ने नया मोड़ तब लिया, जब मृतक के पुत्र यश कुमार और पुत्री नगर पालिका परिषद कार्यालय पहुंचे और चेयरमैन शबाना नाज़ तथा अधिशासी अधिकारी (ईओ) प्रियंका मिश्रा से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई। इस दौरान चेयरमैन शबाना नाज़ ने घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि नगर पालिका बोर्ड की ओर से भी आर्थिक सहयोग दिलाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि परिवार को राहत मिल सके।
इधर, नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा जारी कार्यालय आदेश में सोशल मीडिया और समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए घटना की वस्तुस्थिति की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति में घिसियावन मौर्य को अध्यक्ष तथा कर अधीक्षक शमशाद जुबैर और राजस्व निरीक्षक सलमान खान को सदस्य बनाया गया है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कर तीन दिनों के भीतर अपनी स्पष्ट आख्या प्रस्तुत करे।
बताया जाता है कि सोमवार को बस स्टेशन के मुख्य द्वार पर लगे नगर पालिका के सार्वजनिक पेयजल फ्रीजर एवं उसकी सुरक्षा जाली को छूने के दौरान कथित रूप से करंट लगने से 50 वर्षीय बेचू लाल राजभर, निवासी मेंहदिया, नेहरूनगर, टाण्डा की मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फ्रीजर और उसकी लोहे की जाली में कई दिनों से करंट उतरने की शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन समय रहते आवश्यक मरम्मत या सुरक्षा उपाय नहीं किए गए।
मृतक के नाबालिग पुत्र यश कुमार ने पुलिस को दी गई तहरीर में नगर पालिका अध्यक्ष और संबंधित जेई को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। इस संबंध में टाण्डा कोतवाली प्रभारी निरीक्षक दीपक सिंह रघुवंशी ने बताया कि तहरीर प्राप्त हो गई है। पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
विधिक जानकारों का कहना है कि नगर निकाय द्वारा संचालित सार्वजनिक सुविधाओं में लापरवाही के कारण यदि कोई दुर्घटना होती है, तो प्रथम दृष्टया जांच के बाद संबंधित विभागीय अधिकारियों एवं जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाती है। जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही निर्धारित होती है।
फिलहाल इस संवेदनशील मामले में दो समानांतर प्रक्रियाएं चल रही हैं। एक ओर नगर पालिका की आंतरिक जांच जारी है, तो दूसरी ओर पुलिस घटना की विवेचना कर रही है। अब पूरे जिले की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर इस दर्दनाक हादसे के लिए जिम्मेदार किसे ठहराया जाएगा और पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिल सकेगा।





