शुक्रवार रात जन्माष्टमी, शनिवार को ऐतिहासिक दधिकांदव और रविवार को हारून रशीद का मुख्य मेला; सुरक्षा में कई थानों और दूसरे जनपदों की पुलिस रहेगी तैनात
अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान एडिटर) श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के साथ ही टांडा में ऐतिहासिक दधिकांदव उत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में है।शुक्रवार की रात अर्थात आज जहां मंदिरों व घरों सहित पुलिस थानो में कान्हा के जन्म का उल्लास छाएगा, वहीं शनिवार की रात टांडा नगर में दधिकांदव की भव्यता देखने को मिलेगी। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है।
टांडा का दधिकांदव मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सैकड़ों वर्षों से चली आ रही सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। स्थानीय मान्यता के अनुसार मथुरा-वृंदावन की तर्ज पर आयोजित होने वाला यह उत्सव अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के लिए खास पहचान रखता है। इसे देखने के लिए आसपास के जनपदों से भी लोग पहुंचते हैं।
जन्माष्टमी की रात गूंजेंगे जयकारे
आज की रात श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर नगर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और सजावट होगी। श्रद्धालु व्रत रखकर मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की प्रतीक्षा करेंगे। जन्म के बाद शंख-घंटों और जयकारों के बीच आरती व प्रसाद वितरण होगा।
और कल अर्थात शनिवार की रात में दधिकांदव का भव्य आयोजन होगा, जिससे टांडा में लगातार दो रात कृष्णभक्ति का माहौल बना रहेगा।
दधिकांदव पर सुरक्षा का कड़ा पहरा
भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक इंतजाम किए हैं। जनपद के कई थानों की पुलिस के साथ आवश्यकता के अनुसार दूसरे जनपदों से भी पुलिस बल बुलाया जाएगा। भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
रविवार को आसोपुर में बाबा हारून रशीद का मेला
टांडा में शनिवार रात दधिकांदव के बाद रविवार को आसोपुर में प्रसिद्ध बाबा हारून रशीद का मुख्य मेला आयोजित होगा। इस तरह शुक्रवार से रविवार तक टांडा और आसपास का क्षेत्र धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों से गुलजार रहेगा।
जन्माष्टमी, दधिकांदव और आसोपुर मेले का यह क्रम क्षेत्र की साझी संस्कृति और सामाजिक सद्भाव की तस्वीर भी पेश करता है। पीढ़ियों से चली आ रही इन परंपराओं में आज भी लोगों की आस्था और भागीदारी कायम है।
तहसील व नगर पालिका की तरफ से विशेष व्यवस्थाएं
दधिकांदव उत्सव के अवसर पर टाण्डा तहसील व नगर पालिका प्रशासन की तरफ से परंपरानुसार विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं जिसमें खोया पाया कैम्प व स्वागत कैम्प मुख्य होता है तथा इस दौरान पूरे नगर क्षेत्र में विशेष साफ सफाई व चूने का छिड़काव किया जाता है।
शुक्रवार को कान्हा का जन्मोत्सव, शनिवार को दधिकांदव का जयघोष और रविवार को आसोपुर का मेला—तीन दिन तक टांडा क्षेत्र में आस्था और उत्सव का रंग चढ़ा रहेगा।





