चार बार विज्ञप्ति पर करीब चार लाख खर्च, फिर भी नहीं हो सकी नीलामी; सफाईकर्मियों से कराई जा रही शुल्क वसूली, पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
जलालपुर, अंबेडकरनगर। नगर पालिका परिषद जलालपुर की कार्यप्रणाली पर टैक्सी स्टैंडों की नीलामी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 का ठेका समाप्त हुए करीब पांच माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक नए वित्तीय वर्ष के लिए टैक्सी स्टैंडों की नीलामी नहीं हो सकी। नीलामी में देरी के चलते नगर पालिका को पूरे वित्तीय वर्ष में करीब 50 लाख रुपये के संभावित राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नीलामी कराने के लिए नगर पालिका अब तक चार बार विज्ञप्ति जारी करा चुकी है, जिस पर करीब चार लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आ रही है। इसके बावजूद प्रक्रिया अंजाम तक नहीं पहुंच सकी। बताया जा रहा है कि नीलामी में शामिल होने वाले ठेकेदार पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में कम बोली लगा रहे थे, जिसके चलते प्रक्रिया सफल नहीं हो सकी।
ठेका नहीं हुआ तो सफाईकर्मी बने वसूलीकर्मी
नीलामी प्रक्रिया ठप होने के बाद नगर पालिका ने टैक्सी स्टैंडों से शुल्क वसूली की जिम्मेदारी अपने स्तर पर संभाल ली। इसके लिए आउटसोर्सिंग पर तैनात करीब 10 से 11 सफाई कर्मचारियों को अलग-अलग टैक्सी स्टैंडों पर शुल्क वसूली के काम में लगा दिया गया है।इस व्यवस्था ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर एक और सवाल खड़ा कर दिया है। जिन कर्मचारियों को सफाई व्यवस्था संभालनी चाहिए, उन्हें राजस्व वसूली में लगा दिया गया। इससे नगर क्षेत्र की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका के साथ-साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि पालिका स्वयं वसूली कराकर आखिर कितना राजस्व जुटा पा रही है।
हर महीने करीब 1.20 लाख का खर्च, फिर भी राजस्व पर सवाल
स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब दस कर्मचारियों को वसूली कार्य में लगाने पर उनके वेतन के रूप में नगर पालिका पर हर महीने लगभग 1.20 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च पड़ रहा है। यानी नीलामी न होने से एक तरफ ठेके से मिलने वाला संभावित बड़ा राजस्व प्रभावित हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ वसूली के लिए कर्मचारियों को लगाने पर लगातार खर्च भी हो रहा है।
ऐसे में पालिका की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि टैक्सी स्टैंड की नीलामी समय से करा ली जाती तो निश्चित राजस्व मिलने के साथ कर्मचारियों को उनके मूल कार्य से हटाने की नौबत ही नहीं आती।
चार बार विज्ञप्ति के बाद भी नतीजा शून्य
नगर पालिका की ओर से नीलामी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बार-बार प्रयास किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन चार बार विज्ञप्ति जारी होने के बाद भी नीलामी का सफल न होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले ही प्रक्रिया पूरी कराने की जिम्मेदारी पालिका प्रशासन की थी। महीनों बीत जाने के बाद भी ठेका न हो पाना राजस्व प्रबंधन की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है।
लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जब ठेकेदारों की बोली पिछले वर्ष के मुकाबले कम आ रही थी तो पालिका ने वैकल्पिक व्यवस्था और नीलामी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से क्यों नहीं सुलझाया? आखिर चार बार विज्ञप्ति और करीब चार लाख रुपये खर्च होने के बाद भी पालिका के हाथ खाली क्यों हैं?
बुधवार को भी नहीं पहुंचा कोई ठेकेदार
इस संबंध में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि टैक्सी स्टैंड की निविदा में शामिल होने के लिए ठेकेदारों को आमंत्रित किया गया था। बुधवार को नीलामी प्रक्रिया होनी थी, लेकिन ठेकेदारों के शामिल नहीं होने के कारण नीलामी प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।
अब देखना यह है कि नगर पालिका परिषद जलालपुर टैक्सी स्टैंडों की नीलामी कब तक करा पाती है और तब तक राजस्व नुकसान तथा सफाई कर्मचारियों को वसूली में लगाए जाने की व्यवस्था का जिम्मेदार कौन होगा।




