डराने वाला है आज़ादी पर्व के दूसरे दिन का नजारा! जहां मरीज इलाज और जिंदगी की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं जलता कचरा और उठता धुआं व्यवस्था को दिखा रहा आईना
अम्बेडकरनगर। देश की आजादी का पर्व मनाए जाने के ठीक दूसरे दिन अकबरपुर-टांडा मार्ग पर स्थित महामाया मेडिकल कॉलेज के बाहर जो नजारा सामने आया, उसने अस्पताल की सफाई व्यवस्था और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मेडिकल कॉलेज के दोनों मुख्य गेटों के बीच अस्पताल परिसर से सटकर सड़क किनारे कूड़े के ढेर में दिनदहाड़े आग लगा दी गई। कूड़े से उठता धुआं आसपास फैलता रहा और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

जिस स्थान पर रोजाना बड़ी संख्या में मरीज, तीमारदार, स्थानीय लोग और राहगीर आते-जाते हैं, वहीं कूड़ा जलाए जाने से लोगों में आक्रोश देखने को मिला। मरीज इलाज कराने पहुंचे थे, तीमारदार अपनों की चिंता में थे और राहगीर अपने रास्ते से गुजर रहे थे, लेकिन उन्हें अस्पताल के बाहर धुएं के गुबार का सामना करना पड़ा।
आजादी के जश्न के अगले ही दिन ‘धुएं में घुटती व्यवस्था’!
15 अगस्त को देशभर में स्वच्छता, स्वास्थ्य और जिम्मेदार नागरिकता का संदेश दिया गया। लेकिन इसके अगले ही दिन महामाया मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेटों के बीच सड़क किनारे कूड़ा जलाए जाने का वीडियो सामने आना व्यवस्था पर कटाक्ष करता नजर आया।
अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान के बाहर खुले में कूड़ा जलने से उठने वाला धुआं वातावरण को प्रदूषित करने के साथ वहां मौजूद लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस जगह स्वास्थ्य सेवाएं दी जाती हैं, उसी के बाहर प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधि पर निगरानी आखिर कौन रख रहा है?
मरीजों और तीमारदारों में नाराजगी, राहगीर भी परेशान
कूड़ा जलने से उठते धुएं को लेकर मरीजों, तीमारदारों और आसपास के लोगों में नाराजगी बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल के मुख्य गेटों के बीच सड़क किनारे कचरा जलाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। धुआं सड़क की ओर फैलने से राहगीरों को भी परेशानी होती है।
लोगों का सवाल है कि अस्पताल के कचरे के निस्तारण के लिए यदि कोई व्यवस्था मौजूद है तो कचरे को खुले में जलाने की जरूरत क्यों पड़ी? और यदि व्यवस्था नहीं है तो इतने बड़े मेडिकल कॉलेज में कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है?सफाई के बाद कूड़ा उठाने के बजाय आग के हवाले?
वायरल वीडियो में सफाई के बाद एकत्रित कूड़े को सड़क किनारे जलाए जाने की स्थिति दिखाई दे रही है। इसने अस्पताल की सफाई और कचरा निस्तारण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल सिर्फ इतना नहीं कि कूड़ा किसने जलाया, सवाल यह भी है कि अस्पताल के मुख्य गेट के पास दिनदहाड़े यह सब होता रहा और जिम्मेदारों को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी?
प्रशासन के सामने खड़े हैं कई सवाल
वायरल वीडियो के बाद अब जिम्मेदार अधिकारियों के सामने कई सवाल हैं—अस्पताल से निकलने वाले कचरे के निस्तारण की क्या व्यवस्था है? खुले में कूड़ा जलाने की अनुमति किसने दी? क्या अस्पताल प्रशासन को इसकी जानकारी थी? यदि नहीं, तो निगरानी व्यवस्था कैसी है? और यदि जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
स्थानीय लोगों की मांग है कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर मामले की जांच कराई जाए, कूड़ा जलाने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान हो और अस्पताल के आसपास खुले में कचरा जलाने पर प्रभावी रोक सुनिश्चित की जाए।
आज़ादी पर्व के दूसरे दिन सामने आया यह दृश्य प्रशासन की सफाई व्यवस्था को आईना दिखा रहा है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार इस धुएं को सिर्फ हवा में उड़ता धुआं मानते हैं या फिर इसके पीछे छिपी लापरवाही की जिम्मेदारी भी तय करते हैं।





