अम्बेडकरनगर। विकासखंड टांडा के ग्रामसभा अरसाँवा में मरहूम महताब हुसैन की याद में आयोजित मजलिस में मजलिस-ए-हुसैन की गूंज देर तक सुनाई देती रही। जलालपुर से आए मौलाना मेहदी हसन वायज़ ने मजलिस को खेताब करते हुए कर्बला की कुर्बानी और अज़ादारी के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मौलाना मेहदी हसन ने कहा कि आज दुनिया में जो नमाज़ पढ़ी जा रही है, उसे बचाने के लिए कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपना सर तक कुर्बान कर दिया। उन्होंने कहा कि मजलिस-ए-हुसैन से मिलने वाला इल्म सामान्य ज्ञान नहीं, बल्कि इंसान को हक और बातिल के बीच फर्क समझाने वाला इल्म है।
उन्होंने अज़ादारी का जिक्र करते हुए कहा कि हुसैन के अज़ादार हर कौम और हर धर्म में मिल जाएंगे, जबकि अपने दौर के तानाशाह यजीद का आज नाम लेने वाला भी कोई नहीं मिलता। कर्बला ने यह संदेश दिया कि जुल्म के सामने सिर झुकाने के बजाय हक की राह में कुर्बानी देना ही इंसानियत की पहचान है। मजलिस का आगाज कुरआनख्वानी और पेशख्वानी से हुआ। अंत में मसायबे-कर्बला बयान किए गए तो माहौल गमगीन हो गया और मौजूद मोमिनों की आंखें नम हो उठीं।
मजलिस में मौलाना गुलाम मुर्तुजा, मोहम्मद अब्बास जौहर, सज्जू भाई, पूर्व प्रधान मोहम्मद शमीम, प्रधान प्रतिनिधि हसन हैदर, डॉ. जहीर अब्बास, जैगम अब्बास, मोहसिन अब्बास समेत सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे।




