विभाग पर कथित ‘ज्यादा शुल्क’ वसूली के खेल को लेकर भड़के व्यापारी, लाइसेंसधारक की भूमिका पर भी उठे सवाल
अम्बेडकरनगर। विधिक माप विज्ञान विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीण क्षेत्र के व्यापारियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। वैध मुहर, शुल्क की बाकायदा रसीद और इसके बावजूद चालान की कार्रवाई ने विभागीय जांच व्यवस्था और लाइसेंसधारकों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि विभाग के अधिकृत लाइसेंसधारकों द्वारा निर्धारित सरकारी शुल्क से अधिक रकम मांगी जा रही है और अतिरिक्त रकम देने से इनकार करने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई का दबाव बनाया जा रहा है।
मामला मुंडेहरा गांव के एक किराना दुकानदार से जुड़ा है। दुकानदार के अनुसार उसकी ई-तराजू की मुहर की वैधता समाप्त होने से पहले वह रफीगंज स्थित विधिक माप विज्ञान विभाग के लाइसेंसधारक के यहां मुहर लगवाने पहुंचा था। आरोप है कि वहां उससे निर्धारित सरकारी शुल्क से करीब दोगुनी रकम मांगी गई। अतिरिक्त रकम देने से इनकार करने के बाद दुकानदार ने किसी अन्य अधिकृत स्थान से अपनी तराजू की मुहर लगवाई और उसकी बाकायदा रसीद भी प्राप्त की।
आरोप है कि इसके अगले ही दिन विभागीय टीम दुकानदार की दुकान पर पहुंच गई। टीम ने तराजू से संबंधित रसीद मांगी। दुकानदार ने मुहर लगवाने की रसीद प्रस्तुत कर दी, लेकिन इसके बावजूद उसका चालान काट दिया गया। कार्रवाई से व्यापारी सकते में आ गया और उसने विभागीय जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
‘ज्यादा पैसा नहीं दिया तो चालान?’—व्यापारियों का गंभीर आरोप
स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि रफीगंज स्थित विभागीय लाइसेंसधारक के यहां तराजू की मुहर लगाने के नाम पर निर्धारित सरकारी शुल्क से अधिक धनराशि मांगी जाती है। आरोप यह भी है कि जो व्यापारी अतिरिक्त रकम देने से इनकार करते हैं, उनके प्रतिष्ठानों पर विभागीय कार्रवाई का रास्ता खोल दिया जाता है।
यदि व्यापारियों के ये आरोप सही हैं तो मामला गंभीर है। सवाल उठता है कि क्या निर्धारित सरकारी शुल्क से अधिक रकम देने से इनकार करने वाले दुकानदारों को कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है? हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
अधिक शुल्क की शिकायत पर अधिकारी बोले—‘जानकारी नहीं’
मामले में विधिक माप विज्ञान विभाग के अधिकारी उमेश कुमार सिंह ने बताया कि जांच के दौरान दुकानदार ने केवल दो रसीदें प्रस्तुत की थीं, जबकि उसके पास कई तराजू रखे हुए थे। इसी आधार पर चालान किया गया है। वहीं, लाइसेंसधारक द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक रकम वसूलने के आरोपों के संबंध में अधिकारी ने अनभिज्ञता जाहिर की।
अब विभाग से जवाब मांग रहे व्यापारी
व्यापारियों का कहना है कि यदि किसी प्रतिष्ठान पर कई तराजू हैं तो विभाग नियमानुसार प्रत्येक उपकरण के सत्यापन और दस्तावेजों की जांच करे, लेकिन वैध मुहर और रसीद प्रस्तुत किए जाने के बावजूद चालान की कार्रवाई क्यों हुई, इसका स्पष्ट जवाब विभाग को देना चाहिए। व्यापारियों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, लाइसेंसधारकों द्वारा वसूले जा रहे शुल्क की जांच करने और विभागीय कार्रवाई में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब देखना यह है कि विभाग व्यापारियों के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता सामने लाता है या फिर ‘मुहर और रसीद’ के बावजूद चालान की कार्रवाई पर ही पर्दा पड़ा रहता है।




