जनपद मऊ क्षेत्र निवासी मोहम्मद जमील अहमद खान का पार्थिव शरीर सऊदी अरब से उनके पैतृक गांव पहुंचने पर स्थानीय कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में लोग अंतिम दीदार के लिए पहुंचे और नम आंखों से मरहूम को विदाई दी।
परिजनों के अनुसार मोहम्मद जमील खान कई वर्षों से रोजगार के सिलसिले में दम्माम, सऊदी अरब में रहकर कार्य कर रहे थे। बीते 02 अप्रैल को उनके निधन की सूचना परिवार को मिली, जिसके बाद परिजन गहरे सदमे में आ गए। परिवार की सबसे बड़ी चिंता पार्थिव शरीर को भारत लाने की थी। इस खबर की इंस्ट्राग्राम पर वीडियो देखने के लिए इसे टच करें।
मृतक के परिजन अरशद खान ने सूचना न्यूज़ एडिटर फखरे आलम खान के माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन से संपर्क किया। “बजरंगी भाईजान” के नाम से पहचाने जाने वाले आबिद हुसैन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल भारतीय दूतावास रियाद और विदेश मंत्रालय को पूरी जानकारी भेजी। इस खबर की वीडियो फेसबुक पर देखने के लिए 💐 इसे टच करें
भारतीय दूतावास द्वारा दम्माम निवासी नास शौकत अली को मामले की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद वहां सभी आवश्यक कानूनी और कागजी प्रक्रियाएं पूरी कराई गईं। नास शौकत अली लगातार परिवार के संपर्क में रहे और हर स्थिति की जानकारी देते रहे। वहीं आबिद हुसैन ने भी भारत में परिवार से समन्वय बनाकर पार्थिव शरीर को सुरक्षित वतन पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गत 5 मई 2026 को मोहम्मद जमील खान का पार्थिव शरीर लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचा, जहां से एम्बुलेंस के माध्यम से उसे मऊ लाया गया। गांव पहुंचने के बाद गमगीन माहौल में अंतिम रस्में अदा की गईं। इस दौरान आबिद हुसैन ने भारतीय दूतावास रियाद, विदेश मंत्रालय और नास शौकत अली के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। वहीं मरहूम के परिजनों ने भी वीडियो संदेश जारी कर सूचना न्यूज़, आबिद हुसैन, नास शौकत अली तथा भारतीय दूतावास का शुक्रिया अदा किया। मरहूम के लिए दुआ करते हुए लोगों ने अल्लाह से उनकी मगफिरत और जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता करने की दुआ की।




