सूर्य देवता को अर्ध्य देकर मांगी गई सुहाग और संतान की मंगल कामनाएँ

अम्बेडकरनगर: छठ पूजा महापर्व के अवसर पर शुक्रवार की शाम डूबते सूरज को अर्ध्य देकर जहां मनोकामनाएं मांगी गई वहीं शनिवार को प्रातः काल उगते हुए सूर्य देवता को अर्ध्य देकर अपने सुहाग व संतान की लंबी आयु की प्रार्थनाकी गई।
कोरोना कॉल के दौरान महापर्व छठ पूजा पर श्रद्धालुओं का जोश देखने लायक रहा। नदी के विभिन्न घाटों पर हिन्दू धर्मिक रीतिरिवाजों के अनुसार महिलाओं ने छठी मइया की पूजा अर्चना किया।
शुक्रवार को छठ महापर्व की शाम को डूबते सूर्य की उपासना की जगई और सूर्य देव को पहला अर्घ्य दिया गया। इस अर्घ्य को संध्या अर्घ्य भी कहते हैं। अर्घ्य देने से पहले सूर्य देव और छठी मइया की पूजा की गई। छठ व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इसमें महिलाएं अपने सुहाग और संतान की मंगल कामना के लिए 36 घंटों का निर्जला व्रत रखती हैं। छठ पूजा का प्रारंभ चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से होता है और सप्तमी के दिन अर्थात आज प्रातः काल उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद समाप्त हुआ।
टाण्डा नगर क्षेत्र के हनुमानगढ़ी सहित अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। उक्त अवसर पर नगर पालिका परिषद की तरफ से साफ सफाई का शानदार इंतेज़ाम किया गया था तथा महिलाओं की सुरक्षा के लिए अधिकांश महिला सिपाहियों को घाटों के आस पास तैनात किया गया था।