अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान – एडिटर इन चीफ) टांडा नगर क्षेत्र में सातवीं मोहर्रम पर विभिन्न स्थानों से बरामद हुआ उस दौरान अलम, दुलदुल के अलावा सीनाजनी व ढोल नगाड़ों ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। विभिन्न जुलूसों को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए टांडा कोतवाली निरीक्षक अमित कुमार सिंह भारी पुलिस बल के साथ भ्रमण करते रहे।
सातवीं मोहर्रम का पहला जुलूस परंपरानुसार मीरानपुरा स्थित राजा साहब के इमामबाड़ा से बरामद होकर अपने पारंपरिक मार्गो से होता हुआ अलम, दुलदुल व सीनाजनी के साथ पूरी शान व शौकत से नगर क्षेत्र का भ्रमण किया। शाम लगभग 04 बजे बरामद हुआ उक्त ऐतिहासिक जुलूस देर रात्रि तक जारी रहा। उक्त जुलूस में वक्फ मो.रज़ा कनीज़ फिज्ज़ा बीबी के मुतवल्ली सैय्यद काज़िम रज़ा (राजा नजमी) व टांडा ताजियादार कमेटी के अध्यक्ष सैय्यद ज़ाफ़र रज़ा (राजा परवेज़) सहित भारी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।

सातवीं मोहर्रम का दूसरा जुलूस नगर क्षेत्र के मोहल्लाह कस्बा छोटी बाज़ार स्थित स्वर्गीय मोहम्मद रशीद के आवास से निकल कर पारंपरिक मार्गो से ढोल नगाड़ों के साथ पुनः रशीद के आवास पर समाप्त हुआ। जुलूस में सुरक्षा व्यवस्था के लिए भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा।
तीसरा जुलूस शिया टोला स्थित स्वर्गीय डॉक्टर कल्बे हसन के इमामबाड़ा से अलम व सीनाजनी के साथ बरामद होकर पारम्परिक मार्गो से होता हुआ पुनः वहीं समाप्त हुआ। सातवीं मोहर्रम का चौथा जुलूस सिटकहाँ निवासी जमाल अहमद खलील अहमद के आवास से अलम के साथ बरामद होकर निर्धारित मार्गों से होता हुआ पुनः वहीं आकर समाप्त हुआ।
राजा का मैदान स्थित नयन तारा चौराहा पर एक साथ दो जुलूस अलम व ढोल नगाड़ों के साथ पहुंचा लेकिन टांडा कोतवाली पुलिस ने समझदारी का परिचय देते हुए छोटी बाजार के जुलूस को रज़ा पार्क मार्ग पर रोक कर छज्जापुर के जुलूस को राजा साहब के इमामबाड़े में भेजा और फिर छोटी बाजार के जुलूस ने नयन तारा चौराहा पर जमकर ढोल नगाड़ा बजाया और इसी दौरान वापस लौटे छज्जापुर के जुलूस को रास्ता दिलाकर पुलिस वालों ने दोनों जुलूस को बड़ी समझदारी से पार कराया। इस दौरान टांडा कोतवाली निरीक्षक अमित कुमार सिंह स्वयं मौजूद रहे।
टांडा नगर क्षेत्र के पारंपरिक जुलूसों में मुख्य रूप से वक्फ मुतवल्ली सैय्यद काज़िम रज़ा नजमी, टांडा ताजियादार कमेटी के अध्यक्ष सैय्यद जाफर रज़ा परवेज़, टांडा ताजियादार कमेटी के सचिव सैय्यद रईसुल हसन गुड्डू आदि मौजूद रहे। सातवीं मोहर्रम पर इमाम चौकों पर नज़र व फातिहा ख्वानी की गई।