अम्बेडकरनगर (रिपोर्ट: आलम खान एडिटर 8090884090) शासन की मंशानुसार गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य आखिर कैसे होगा जब ठेकेदारों द्वारा अधिकारियों को भारी भरकम कमीशन भेंट किया जाता है कमीशन का नाम सिस्टम रख दिया गया है। सिस्टम बढ़ाने से आक्रोशित जनपद की ए श्रेणी की नगर पालिका टाण्डा के ठेकेदारों ने प्रदर्शन कर टेंडर बहिष्कार का एलान कर दिया है।
नगर पालिका परिषद टाण्डा के कार्यालय पर पहुंचे दर्जनों ठेकेदारों ने आक्रोश प्रकट किया और आगमी 10 दिसम्बर को होने वाली टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से इनकार कर दिया तथा टेंडर को निरस्त करने की मांग किया।
नगर पालिका परिषद के अधिशाषी अधिकारी को दिए ज्ञापन में नगर पालिका कर्मियों द्वारा उत्पीड़न का भी आरोप लगाया गया। ठेकेदारों ने संयुक्त रूप से एक सुर में कहा कि नगर पालिका के सभी टेबलों पर उनके भुगतान की फाइल रोक कर सिस्टम (कमीशन) की मांग की जाती है और किसी तरह का कोई सहयोग भी नहीं किया जाता है। आरोप है कि कमीशन में बढ़ौतरी कर दी गई और और कार्य भी मानक अनुरूप मांगते है जिसके कारण ठेकेदार का मूलधन भी निकलना मुश्किल हो गया है और ठेकेदार लगातार नुकसान उठा रहे हैं।
“किसको कितना कमीशन जाता है” के सवाल पर ठेकेदार खुल कर नहीं बोले लेकिन उन लोगों ने दावा किया कि 40 प्रतिशत तक कमीशन नीचे से ऊपर तक जाता है।
विश्वसनीय सूत्र बताते है कि अभी तक नगर पालिकाध्यक्ष अथवा प्रशासक के नाम पर 10 प्रतिशत, अवर अभियंता (जेई) को 05 प्रतिशत, अधिशाषी अधिकारी (ईओ) को 05 प्रतिशत, कार्यालय में 03 प्रतिशत, पीडब्लूडी में 02 प्रतिशत व सभासदों को 02 प्रतिशत सिस्टम (कमीशन) दिया जाता रहा है लेकिन अब कलेक्ट्रेट पर 06 प्रतिशत अतरिक्त सिस्टम बढा दिया गया है तथा अवर अभियंता भी 05 प्रतिशत के स्थान पर 10 प्रतिशत की मांग करती हैं और सभासद भी 02 से बढ़ा कर 03 प्रतिशत की मांग करते हैं। सिस्टम का खुलासा ये यह कि अभी तक 27 प्रतिशत ही कमीशन दिया जा रहा है जो अब बढा कर 40 किया जा रहा है जिसका ठेकेदार विरोध कर रहे हैं।
बहरहाल प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ निर्माण कार्यों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से चाहे जितना बड़ा कदम क्यों ना उठा लें, समस्त टेंडर प्रक्रियाओं को क्यों ना ऑनलाइन कर दें लेकिन निचले स्तर से लेकर कलेक्ट्रेट तक एक सिस्टम बना हुआ है जिसे ठेकेदारों द्वारा पूर्व की तरह पालन भी किया जाता था और निर्माण कार्य में कमी कर उनके सिस्टम को पहुंचाया भी जाता रहा लेकिन अब लगातार होने वाली जांचों से बचने के लिए अधिकारी निर्माण कार्य को जहां मानक के अनुरूप चाहते हैं वहीं सिस्टम को 27 प्रतिशत से बढा कर 40 प्रतिशत पर पहुंचा दिया है जिससे ठेकेदारों की कमर टूटने लगी और वो विरोध पर उतर आए।
विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से टाण्डा ठेकेदार एसोसिएशन के अध्यक्ष आरिफ खान व महामंत्री संजय कुमार गुप्ता सहित उपाध्यक्ष मुजीब अजमद सोनू व अमजद खान, सचिव प्रमोद गुप्ता, सुहैल इकबाल खां व शकील अहमद तथा सदस्य कबीर अहमद, चंद्रेश कुमार, मोहम्मद खालिद, रामशंकर यादव, इस्तियाक खान, वसीम, जावेद अख्तर, मंगरु चौहान, सबीह अहमद सब्बू जगदीश वर्मा आदि मौजूद रहे।